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अखिल भारतीय भूमिहीन सर्घष समिती

1970 में भूमि सुधार अधिनियम के तहत गांव कंझावला में खेती के लिए जमीन आवंटित की गई यह जमीन बिल्कुल बंजर थी भूमि सुधार अधिनियम के तहत यह जमीन 5 साल के पट्टे पर आवंटित की गई थी लेकिन यह D.L.R.Act1954 में 74/4 की सूची में आता है इस नियम के तहत प्रावधान था की अगर यह जमीन खेती लायक हो गई तो यह जमीन आसामी की हो जाएगी कंझावला में सभी आसामीयो ने जमीन को खेती लायक बना दिया था इसलिए कानूनी इस जमीन का मालिक आसामी हो गया लेकिन सरकार यह पट्टे रद्द करना चाहती थी और अन्य स्वर्ण जाति के लोग इस जमीन को छुड़वाना चाहते थे इस मामले से sc-st और स्वर्ण जाति के लोगों में तनाव पैदा हो गया तब कंझावला केSC समुदाय ने भूमिहीन संघर्ष समिति का गठन किया उस वक्त के सदस्यों के नाम थे प्रभु दयाल चंद्र हवलदार फूलवती सूबे सिंह उर्फ गंजा मंगतू बाल्मीकि धर्म सिंह परशुराम उर्फ भूडे डालचंद मनियार केहर सिंह शेर सिंह राम सिंह और अन्य लोग इस समिति ने इस जमीन को बचाने के लिए लगातार 6/7 साल संघर्ष किया और लड़ाई लड़ी तब जाकर 40% लोग इस जमीन के मालिक बन पाए लोगों को उनका अधिकार मिल गया इसलिए समिति ने काम करना बंद कर दिया और इस समिति का नाम अन्य लोग अपने स्वार्थ के लिए यूज करने लगे 1980 के बाद स्वार्थी लोग इस समिति का नाम लेकर अपना स्वार्थ सीधा करते रहे 2018 में कुछ इच्छुक व्यक्तियों ने समिति के नाम में सुधार किया और इसे अखिल भारतीय भूमिहीन संघर्ष समिति का नाम दिया गया

अनुसरण में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के ज्ञापन पत्र के यथा प्रभावी पंजीकरण अधिनियम 1860 अधीन " अखिल भारतिय भुमीहिन सर्घष समिती.............. "नामक संस्था बनाने के इच्छुक है


2- पंजीकृत कार्यालय सदैव राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में ही रहेगा और वर्तमान में यह इस पते पर स्थापित है- मकान न0 41 गाव कन्झावला दिल्ली 81नियर शिव मन्दीर

इच्छुक व्यक्तियो के नाम व पता व्यवसाय पद निमन प्रकार से है

  • 1 अध्यक्ष, देवप्रकाश 9210010006
  • 2 उपाध्यक्ष प्रवेश कवर 7982021322
  • 3 कोषाअध्यक्ष रोहताश कवर 9811556920
  • 4 सचिव बलराम 9999715074
  • 5 उपसचिव महैन्द्र सिहं 7982834821
  • 6 जूनियर सचिव सरवर कुमार 9013347028

अन्य इच्छुक व्यक्ति

  • 1 रणधीर सिंह गावं ज्योन्ति 8130214590
  • 2 अनामीदास गावं छावला 981867163
  • 3 रणबीर गावं लाडपुर
  • 4 रमेश गावं लाडपुर
  • 5 उमेद सिह कटारिया बवाना
  • 6 राजु कटारिया बवाना
  • 7 नविन कन्झावला
  • 8 प्रविन बवाना
  • 9 नफे सिह सापला
  • 10 राजु सापला

योग्यताएं

सदस्यता-शपथ पत्र में उल्लेखित सभी सदस्य,कार्यकारणी के सभी सदस्य और वो हर व्यक्ति जो संस्था के नियमों और उद्देश्यों को मानता हो और जिसे की कार्यकारिणी सदस्य के रुप में स्वीकार करें,वो संस्था का सदस्य बन सकता है..धर्म ,जाति या लिंग के आधार पर सदस्यता के लिए कोई बंदिश नही होगी ।अन्य योग्यताएं इस प्रकार होगी:-

  • (1)कोई भी व्यक्ति (पुरुष या महिला) जिसकी आयु 18 वर्ष से अधिक हो वह संस्था का सदस्य बन सकता है
  • (2)-वह किसी प्रकार से नैतिक दोषी न हो तथा किसी अपराध में न्यायालय से किसी प्रकार दण्डित न किया गया हो ।
  • (3)-संस्था के उद्देश्यों में अपनी पूर्ण आस्था रखता हो तथा नियम व उपनियम का पालन करने को वचनबद्ध हो।
  • (4)-देशहित व सामाजिक कार्य करने का जज्ब़ा रखता हो।
  • (ii) सदस्यता शुल्क:- साधारण सदस्य बनने के लिए सदस्य शुल्क10/-(दस रुपये)सालाना है।जो नियत समय पर संस्था में जमा कराना आवश्यक होगा।
  • (iii) सदस्यता सीज़ होना:- किसी भी सदस्य की सदस्यता मत्यु,अयोग्य पाए जाने पर,नैतिक आचरण का दोषी पाए जाने पर,या फिर छुट्टी के लिए प्रार्थना पत्र दिए बगैर लगातार तीन बैठकों से अनुपस्थित रहने पर,या कार्यकारिणी के ग्यारह में से छह पदाधिकारी सदस्य के व्यवहार से संतुष्ट ना हो,पागल होने की दशा में ,संस्था के उद्देश्यों अथवा हितों के खिलाफ कार्य करते पाए जाने पर,या फिर सदस्य के रुप में उससे जिस कार्य की अपेक्षा ना हो,इन दशाओं में कार्यकारिणी सदस्यता सीज़ करने का अधिकार रखती है।
  • (iv) सदस्यता रद्द होना :-संस्था की कार्यकारिणी किसी भी व्यक्ति ,सदस्य की उपरोक्त कारणों से सदस्यता रद्द कर सकती है..कार्यकारिणी सदस्य की सदस्यता रद्द करने का रिकार्ड अपने पास रखेगी।

संस्था की कार्यकारिणी:-

(i) संस्था को सुचारु रुप से चलाने के एक कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा..कार्यकारिणी में सदस्यों की न्यूनतम और स्थायी संख्या 11 पदाधिकारी और कार्यकारिणी द्वारा नियुक्त सदस्यों की संख्या 16 से अधिक नही होगी..पदाधिकारियों को चुनने के लिए गुप्त मतदान प्रणाली का प्रयोग किया जाएगा।

चुनाव
  • 1-संस्था का चुनाव हर पांच साल बाद होगा ।
  • 2-चुनाव संस्था के छह पद अध्यक्ष(एक),उपाध्यक्ष(तीन),महासचिव(दो),सचिव (चार) और कोषाध्यक्ष के एक पद के लिए होगा,सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार चुनी गयी कार्यकारिणी के पदाधिकारियों को होगा ।
  • 3-चुनाव का संचालन एक चुनाव कार्यसमिति करेगी जिसमें संस्था से संबधित पूरे भारत में राज्य के अध्यक्ष सदस्य होगे ।
  • 4-सदस्य चुनाव के दिन स्वयं या पत्र या ईमेल ,एसएमएस के माध्यम से मत कर सकेंगे ।
  • 5.संस्था का कोई भी व्यक्ति 11 प्रस्तावकों की सहमति के साथ चुनाव लड़ सकेंगा ।
  • 6-चुनाव में नामांकन के लिए कार्यकारिणी जो शुल्क निर्धारित करेगी (अधिकतम पांच सौ रुपये) वो शुल्क सदस्य को नामांकन फार्म के साथ जमा कराना होगा।
  • 7-एक सदस्य एक ही पद के लिए चुनाव लड़ सकता है ।
  • 8-चुनाव में मत देने का अधिकार उसी सदस्य को होगा जिसके पास संस्था का पहचान पत्र और मतदाताओं की लिस्ट में नाम होगा
  • 9-चुनाव लड़ने से पहले सदस्य को संस्था का बकाया (यदि कोई हो)चुकाना होगा ।कोषाध्यक्ष की अनुमति के बाद ही नामांकन स्वीकार किया जाएगा ।

-कार्यकारिणी के सदस्यों का कार्यकाल:-

कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी पांच साल के लिए चुनें जाएगें..कार्यकाल उनके निर्वाचित होने के तिथि से शुरु होगा।चुने गये पदाधिकारी को पुन नियुक्त किया जा सकेगा ..कार्यकारिणी किसी पदाधिकारी को उसका कार्यकाल खत्म होने बाद अगले पदाधिकारी के निर्वाचन होने तक अपने पद पर बने रहने को मंजूरी दे सकती है इसके अलावा आपात स्थिति में कार्यकारिणी का कार्यकाल आगे बढ़ाया जा सकता है लेकिन इसे केवल एक साल के लिए ही आगे बढ़ाया जा सकेगा और इसके लिए आम सभा के 2/3 सदस्यों की अनुमति अनिवार्य होगी किसी भी हालत में कार्यकाल इससे ज्यादा नही बढ़ाया जा सकेगा।कार्यकारिणी के 16 सदस्य जिनकों कार्यकारिणी नियुक्त करेगी उनका कार्यकाल भी पांच साल के लिए होगा सदस्यों में से किसी को अय़ोग्य पाए जाने पर कार्यकारिणी को सदस्य को हटाने का अधिकार होगा लेकिन इसके लिए ग्यारह में से छह सदस्यों की अनुमति आवश्यक होगी यहीं नियम अस्थाई सदस्यों पर लागू होगा।अस्थाई सदस्यों का कार्यकाल एक साल का होगा इसे केवल कार्यकारिणी की अनुमति से केवल एक साल के लिए ही और बढ़ाया जा सकेगा ।

(iii)-कार्यकारिणी में रिक्तियां:-अगर किसी कारण से कार्यकारिणी का कोई सदस्य अपने पद से इस्तीफा दे देता है ,या किसी सदस्य की मत्यु हो जाती है,सदस्यता निलंबित होने की दशा में ,या किसी अन्य कारण के कार्यकारिणी का कोई पद खाली होता है तो कार्यकारिणी में संतुलन बनाए रखने के लिए कार्यकारिणी नॉमिनेशन के जरिए उस पद को भर सकती है।

(iv)-कार्यकारिणी की शक्तियां :-विधिक शक्तियों को छोड़कर कार्यकारिणी के पास संस्था को सुचारु रुप से चलाने और संस्था के उद्देश्यों की पूर्ती के लिए कार्यकारिणी के पास असीमित शक्तियां होगी।

(a) कार्यकारिणी संस्था के धन को सुरक्षित रखने के लिए किसी बैंक या संस्थान में संस्था के नाम से एक अकाउंट खोल सकती है..और संस्था के दो सदस्य अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष इस अकाउंट का परिचालन करेगें।

(b) संस्था के कार्यों के लिए धन जारी करना या संस्था के उद्देश्यों से मेल खाती संस्थाओं को मदद करना।

(c) संस्था का वो धन जिसकी अभी तुरंत आवश्यकता नही हो संस्था के लाभ के लिए कार्यकारिणी उस धन का कहीं निवेश कर सकती है।

(d) सोसाईटी के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कार्यकारिणी किसी बैंक अथवा संस्थान से लोन ले सकती है ..या सोसाईटी की संपत्ति को गिरवी रख सकती है।

(e) कार्यकारिणी किसी भी श्रेणी के कर्मचारियों की संस्था के लिए नियुक्तियां कर सकती है या कर्मचारियों को निकाल सकती है किसी भी प्रकार की नियुक्ती के लिए नियम बना सकती या किसी नियम को रद्द कर सकती है

(f) कार्यकारिणी सभा संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संस्था की शाखा या उपशाखा(भारत या विदेश में )का गठन कर सकेगी संस्था के राज्यों के अध्यक्ष कार्यकारिणी की अनुमति के बाद की किसी शाखा या उपशाखा (केवल अपने राज्य में ) का गठन कर सकेंगे। ..और संस्था के किसी सदस्य को उसकी जिम्मेदारी दे सकती है कार्यकारिणी की मदद के लिए कार्यालय में जिन स्टॉफ की नियुक्ति होगी उनको स्वतंत्र रुप से कोई अधिकार नही होगा वे कार्यकारिणी के आदेश और संस्था के नियमों के मुताबिक कार्य करेंगे।

(g) अस्थायी नियुक्तियां:-कार्यालय के लिए या संस्था से संबधित किसी व्यक्ति या उप -संस्था की नियुक्ति की आवश्यकता पड़ती है तो कार्यकारिणी अध्यक्ष की अनुमति से नियुक्ति करेगी।.दिल्ली से बाहर नियुक्ति के लिए राज्यों के अध्यक्ष नियुक्ति करेंगे लेकिन इसकी पूर्व सूचना कार्यकारिणी को देंगे ।बिना कार्यकारिणी की अनुमति के कोई भी नियुक्ति वैध नही मानी जाएगी।

(h)आय का स्रोत :-

  • (क)चंदे के द्वारा ।
  • (ख)सदस्यता शुल्क द्वारा ।
  • (ग)भारत सरकार,समाज और अन्य के अनुदान द्वारा ।
  • (घ)संस्था यदि सदस्य/अन्य के लिए मकान इत्यादी बनाती है तो उससे होने वाले मुनाफे के द्वारा।
  • (च)न्यूज पेपर या मैगजीन निकालकर
  • (छ)धर्मशाला से दान या शुल्क के रुप में।

(v) कार्यकारिणी के सदस्यों की बैठक:-संस्था की कार्यकारिणी की बैठक एक माह में एक बार होनी अनिवार्य होगी।इसके लिए सात दिन पहले सदस्यों को सूचना देनी जरुरी होगी ।आपातकाल बैठक तुरंत बुलाई जा सकेगी ।या किसी बैठक के लिए कार्यकारिणी के तीन सदस्य मांग करें।

(vi)बैठक के लिए नोटिस :-
कार्यकारिणी की बैठक के लिए सदस्यों को सात दिन पहले सूचना देनी अनिवार्य होगी।लेकिन आपात या अन्य किसी जरुरी स्थिति में अध्यक्ष कार्यकारिणी की बैठक तुरंत करने की इजाजत दे सकता है

(viii)निर्णय:- कार्यकारिणी में बहुमत के आधार पर निर्णय पारित माने जाएगें..प्रत्येक सदस्य का एक वोट होगा अगर मामला टाई रहता है तो उस स्थिति में अध्यक्ष को निर्णायक मत करने का अधिकार होगा।

(ix)प्रस्ताव पारित होना- कोई भी प्रस्ताव कार्यकारिणी में बहुमत के आधार पर पारित होगा और प्रस्ताव पर अंतिम स्वीकृति अध्यक्ष की होगी।अध्यक्ष की अनुमति और सहमति के बिना कोई प्रस्ताव पास नही माना जाएगा।पास प्रस्ताव पूरे भारत में संस्था पर लागू होगा।

4- संस्था के उद्देश्य एवं लक्ष्य

3-संस्था का कार्यक्षेत्र संपूर्ण भारत होगा ।

1-संस्था के सदस्यों द्वारा आम आदमी में बंधुत्व,सहयोग, भाईचारा और राष्ट्र प्रेम की भावना को बढ़ावा।

2-समाज को संगठित करना तथा समाज के विकास व सुख शांति कायम करने के 26-पाकृतिक आपदाओं जैसे -बाढ़ ,सूखा,भूकंप,या तूफान आदि के समय पीड़ितों को चिकित्सा ,भोजन,आवास ,यातायात,व अन्य सामग्री उपलब्ध कराना और हर संभव सहायता प्रदान करना ।

27-ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल(प्याऊ)आदि का निर्माण करना व व्यवस्था और रख रखाव का प्रबंध करना,उद्यान आदि का निर्माण एवं व्यवस्था तथा इन सबसे संबधित संस्थाओं का सहयोग लेना-देना

28-शिक्षा ,सांस्कृतिक व अन्य सामाजिक गतिविधियों के विकास के लिए विभिन्न कार्य योजना व कार्यक्रम चलाना -जैसे प्रौढ़ शिक्षा ,निबंध प्रतियोगिता,प्रदर्शनी,जलसे सेमिनार,सांस्कृतिक कार्यक्रम,प्रेस कांफ्रेंस आदि ।

29-सरकार द्वारा विशेष स्वास्थ्य सेवाओं का प्रचार प्रसार करना,क्षयरोग ,कैंसर,एड्स,जैसी घातक बीमारियों के प्रति लोगों को जागरुक करना एवं लोगों को बीमारियों के बारे में सरकारी योजनाओं को बताया एवं चिकित्सा सुविधा हेतु सही मार्गदर्शन करना ।

30-विकलागों के सेवार्थ विभिन्न योजनाएं बनाना एवं संचालन करना ।

31-संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संस्था के नाम जमीन और भवन आदि खरीदना और किराये पर लेना देना ।

32-लोगों को घर मुहैया कराने के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए मकान इत्यादी बनवाना ।

33-संस्था की समस्त आय आयकर के अधिनियम की धारा 11(5)1964 के तहत जमा की जाएगी ।

34-संस्था द्वारा अर्जित आय सामाजिक ,धार्मिक और प्राणीमात्र के विकास में लगाई जाएगी,संस्था के माध्यम से समस्त कार्य करना जो संस्था के उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सहायक हो और संस्था द्वारा करने के लिए आवश्यक हो।संस्था की चल अछल संपत्ति से प्राप्त समस्त आय व कमाई ज्ञापन पत्र में उल्लेखित संस्था के उद्देश्य वे लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु पूर्णत प्रयोग की जाएगी और लगायी जाएगी तथा इसका कोई भी लाभ संस्था के वर्तमान या निर्वतमान सदस्यों के माध्यम से दावा करने वाले किसी एक या किसी कोई सदस्य संस्था की चल अचल संपत्ति पर कोई व्यक्तिगत दावा नही करेगा। या इसकी सदस्यता के आधार पर किसी प्रकार का लाभ प्राप्त नही करेगा ।